मेरी ज़िद बोलेगी, मेरा किरदार बोलेगा,
मेरे हौसलों के आगे, तेरा किरदार डोलेगा
बहुत ख़ामोश रहकर भी, बहुत कुछ सह लिया मैंने,
अब मेरी जीत का क़िस्सा, तेरा संसार बोलेगा।
मेरे हिस्से में जो आए, अँधेरे कम न थे लेकिन,
मेरे जलने से रोशन अब, हर एक दरबार बोलेगा।
मैं गिरकर भी सँभला हूँ, मैं टूटकर भी निखरा हूँ,
मेरी ठोकर का हर क़िस्सा, मेरा हर वार बोलेगा।
जिन्होंने मेरी राहों में, कभी काँटे बिछाए थे,
मेरी मंज़िल को देखकर, उनका भी व्यवहार बोलेगा।
अभी ख़ामोश हूँ लेकिन, इसे कमज़ोर मत समझो,
मेरे सब्र के टूटने पर, मेरा हुंकार बोलेगा।
मेरी मेहनत की स्याही से, नई तक़दीर लिखनी है,
मेरे हाथों की लकीरों पर, मेरा अधिकार बोलेगा।
न झुकना सीखा है मैंने, न रुकना मेरी फ़ितरत है,
मेरी मंज़िल के आगे अब, मेरा संकल्प बोलेगा।
ये अंतिम हार है मेरी, अब जीतो का ज़माना है,
मेरे संघर्ष का हर क़तरा, मेरी जयकार बोलेगा।
अभी तो बस शुरुआत है, अभी मंज़िल कहाँ आई,
जब सफलता मिलेगी तो, मेरा हर किरदार बोलेगा।
अब मेरी ज़िद बोलेगी, मेरा किरदार बोलेगा,
मेरे हौसलों के आगे, तेरा किरदार डोलेगा
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