सींचा... तप, त्याग से जिस प्रेम
की पौध को
पत्तियां रोज गिरा जाती है आजकल
ये कम्बख्त जहरीली हवा।
-ललिता शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X