तुमने हमें आँखों में डूबो दिया,
हम इश्क़ में तैर गए,
तुमने हमें बांहों में डूबो दिया,
हम गले मिलकर तैर गए,
तुमने हमें अदाओं में डूबो दिया,
हम तुम्हारी बातों में तैर गए,
तुमने हमें होंठों के सुर से डूबो दिया,
हम तुम्हारी मुस्कान में तैर गए,
अब हाल जाना तो जानां की कैद में हूँ'ललित',
इनकी हुकूमत में दिल से चलने लगे,
इनकी ज़मानत से रह गए।
- ललित दाधीच
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