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दर्द कैसा भी हो छिपा ही लेंगे

                
                                                         
                            मैंने सब कुछ तो वारा
                                                                 
                            
तेरी जिंदगी सxवारा
तेरी सांसों को ताजगी दी
सह संताप भानू का
बदन को सादगी दी
क्या कुछ न दिया ऐ मनुज
तुझसे असहज न कुछ मांगेंगे
दे तनिक जगह इस धरा पर
हर खुशी तुझसे बाटेंगे
दे छाँव, फल,बौछार जल का
जो बची जिंदगी नववर्ष में
तुझको खिलती हरियाली से
सिंचित मन को कर डालेंगे
इस वृक्ष का तुझसे वादा है
मौसम का तकाजा झेल ही लेंगे
दर्द कैसा भी हो छिपा ही लेंगे
दर्द कैसा भी हो छिपा ही लेंगे....
-कुलदीप यदुवंशी
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2 वर्ष पहले

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