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अनुभवों को लिखना

                
                                                         
                            मैनुअल से डिजिटल देखा,
                                                                 
                            
वोटर आईडी से आधार तक देखा,
लढी-बैल से ट्रेक्टर तक देखा,
घी के हलुआ से चाय तक देखा,
संस्कारों से वृद्धाश्रम तक देखा,
पतिव्रता नारी से,
लिव इन रिलेशनशिप तक देखा
डकैती से साइबर फ्राड तक देखा।
अब आगे क्या-क्या देखेंगे,
बच्चे गूगल से पूछेंगे,
फिर इतने अनुभवों को,
कैसे कहां लिखा पाएंगे,
कब तक बच्चों की,
हां में हां कह पाएंगे,
दिनों-दिन गिरते हुए,
समाज में कैसे रह पाएंगे,
अपराधी, झूठे, मक्कारों,
के बीच कब तक रह पाएंगे।
-कुलदीप शुक्ला 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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