ना महंगाई ने मारा,
ना बेवफाई ने मारा,
ना तन्हाई ने मारा,
ना अपने ने मारा,
ना गैरों ने मारा,
मैं फकत अपनी,
महत्वाकांक्षा से हारा।
बचपन से सीखा,
जवानी में आया,
संस्कृति को जिया ,
संस्कारों को अपनाया ,
हकीकत में मैं,
विचारों से हारा।
किसी ने पुचकारा,
किसी ने गले लगाया,
किसी ने गरियाया,
किसी ने मारा,
सच बताऊं मैं,
अपेक्षाओं से हारा।
- कुलदीप शुक्ला
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