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राजनीति का व्यापार

                
                                                         
                            राजनीति को,
                                                                 
                            
सेवा भाव से नहीं,
व्यापार की तरह कीजिए।
बदलते परिवेश में,
अपने आपको नित नए ,
तरीकों से बदलते जाइए।
विकास का क्या,
आज है कल ढह जाएगा,
उद्घाटन से पहले और बाद में,
नए पुलों का बहना,
बरसात में सड़कों का टूट जाना,
रास्ते में गड्ढों की वजह से,
दुर्घटनाओं का होना,
अब आम बात हो गई है।
आप कमीशन मोटा लीजिए,
हो सके तो ठेकेदार से,
आधी धनराशि वसूलिए,
विकास का क्या,
आज है कल ढह जाएगा।
आज है कल ढह जाएगा।।
-कुलदीप शुक्ला
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2 महीने पहले

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