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खामोशियां

                
                                                         
                            खामोशियां इतनी ना रक्खो,
                                                                 
                            
दूरियां बढ़ती चली जायं,
अन्दर ही अन्दर मत घुटना,
कहकर मन को हल्का कर लेना।
बेवजह बात करने की,
आपस में आदत डालो,
बातों में कभी अर्थ ना ढूंढना,
कहीं अर्थ में अनर्थ ना हो जाए।
जोर-जोर से हंसना नहीं आता,
फिर भी मुस्कराकर बोलो,
अजनबी से दर्द बता देना,
किन्तु अपनों से छिपाए रखना।
- कुलदीप शुक्ला
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2 महीने पहले

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