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बहुत है

                
                                                         
                            ग़मगीन हूँ पर चेहरे पर मुस्कान बहुत है,
                                                                 
                            
मुझे देखकर दुश्मन सारे हैरान बहुत है ।।

कहते है इश्क़ होता नही हो जाता है लेक़ि,
मोहब्बत में समय का नुकसान बहुत है ।।

निकाल भी दिया दिल से तो कोई गम नही,
इस शहर में किराए का मकान बहुत है।।

एक तेरी उपस्थिति गुलजार सा लगता था,
जब से तू गई है, शहर सुनसान बहुत है ।।

कैसे कर लूं यकीं हर किसी में कुलदीप,
फ़क़त स्वार्थ में जिंदा, इंसान बहुत है ।।
-कुलदीप कुमार यादव
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2 वर्ष पहले

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