वक्त चाहे लाख बुरा हो कितना,
हाथ कभी फैलाना नहीं,
देकर मज़बूरी का हवाला,
जख्म हर किसी को दिखाना नहीं,
टूटता है दिल सभी से एक बार,
छोटी सी बातों को दिल से लगाना नहीं,
नहीं हर कोई अपना यहाँ,
राज सबको बताना नहीं,
बेटियों को मर्यादा सिखाने में,
बेटों को तुम भूल जाना नहीं,
पत्थर हृदय के लोग है यहाँ,
मोम-सा दिल बनाना नहीं,
संकटों के बादल में घिरकर,
हिम्मत अपनी हार जाना नहीं,
पूरे करना हर ख्वाब अपने,
चादर से ज्यादा पैर पसारना नहीं।।
- क्षत्रिय दीपिका
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