शाम ऐ चमन लेकर
चला गया है दूर मुझसे
वो वक्त़ मेरा शाम ऐ चमन लेकर
जोड़कर बिखरीं यादों को माला बना
जी रहे हर दर्द को मुकम्मल कर
किस्मत ने किस मोड़ पर ला खड़ा दिया हमको
उड़ गया रंग राज़ रोशनी को धुंधला कर
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