नासीब में मंजिल करीब नहीं है
नासीब में मंजिल करीब नहीं है
तो दूर ही सही है
ठोकरें इतनी है
शायद किस्मत को मंजूर नहीं है
मैं तोबा तो कर लूं
मगर मेरी रूह को सुकून नहीं है
हमने तो सिददत से चाहा था रब को
ये इस जहां की बात नहीं है
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