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टूटने पे आए तों फलक का सितारा क्या है

                
                                                         
                            अग़र तुम हमारे नहीं तो फिर हमारा क्या है
                                                                 
                            
इन तड़पती निगाहो का फिर सहारा क्या है

चाँद-तारे ये जहाँ भर का हुस्न रत्तीभर नहीं
उसकी निगाहो के आगे क़ोई नज़ारा क्या हैं

ज़माने क़ो क्या पता इश्क़-ए-बिस्मिल का
टूटने पे आए तों फलक का सितारा क्या है

ये अना कहाँ पऱ आती हैं ये तों सोचो ज़रा
इश्क़ में हमारा क्या हैं और तुम्हारा क्या हैं

जान बड़ी सस्ती हैं उस एक चेहरे के आगे
जहाँ में उससे ज्यादा जान सें प्यारा क्या हैं

मुझसें मेरे इश्क़ का सबूत मांगते है ये लोग
जान तक गिरवी है ये बोलते हैं हारा क्या है

कृष्णा ये जो इश्क़ हैं न वो फिर नहीं होता
इसमें पहला अंतिम और फिर दुबारा क्या हैं..
-कृष्णा शर्मा
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2 महीने पहले

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