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आख़िरी बार

                
                                                         
                            वो आखरी बार का होना,
                                                                 
                            
आखरी बार.....
कब ,किससे, कौन, कहां आखरी बार मिलेगा?
स्कूल से घर जाते हुए बाय,
कल फिर मिलेंगे,
किसी को याद है कब कहे थे।
तब कहां पता था आखिरी बार दोबारा कब मिलेंगे।
आखरी बार कब कहा था मां से मै कब बड़ा होऊंगा,
और ....फिर बच्चा बन जाऊं वह पल कभी आया ही नहीं।
आखरी बार कब तुमने अपनी किताबें,
अपने स्कूल बैग,
अपनी अलमारी में रखी यादों के कुछ अनमोल धरोहर टटोली है।
आखरी बार अपने स्कूल की दहलीज कब पार की थी ?
कब अपने पसंदीदा स्कूल टीचर से मिले हो ?
आखरी बार कब दोस्तों के साथ स्कूल बंक किया हो,
आउटिंग पर गए हो या कहा हो आई एम ऑलवेज विद यू।
जिंदगी की किताब के जो खूबसूरत पन्ने थे ,
उन्हें आखिरी बार कब पलटे थे......
याद है कुछ ,
हालांकि तब हम नहीं जानते थे ,
वह आखरी बार का होना जीवन में दोबारा नहीं होगा ।
फिर भी जीवन को बड़ी तेजी से जीते चले जा रहे है।
-सविता
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