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‎वो अब प्रेम कहानियों का दीवाना है। ‎

                
                                                         
                            मातृभाषा अपनी है,
                                                                 
                            
‎परंतु मुझे लगती पराया है।
‎
‎विश्वगुरु, विश्व गुरु की
‎कमजोरी बनती जा रही अंग्रेज़ी है।
‎मैं तो दुखी हूँ,
‎शब्द तो बहुत हैं,
‎परंतु क्या-क्या लिखूँ,
‎बात बड़ी है,
‎समय कम।
‎
‎संस्कृत, हिंदी, लोकभाषाएँ
‎होती जा रही छिन्न हैं।
‎
‎जहाँ गूँजते थे गायत्री मंत्र,
‎जहाँ पढ़ते थे गीता शास्त्र,
‎वो अब प्रेम कहानियों का दीवाना है।
‎
‎शब्द बहुत हैं,
‎परंतु समय कम है
‎
‎
 
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46 मिनट पहले

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