ये धरती केवल ज़मीन नहीं,
ये शौर्य की अमर कहानी है।
हर कण में त्याग की ज्योति जले,
हर धड़कन हिंदुस्तानी है।
जहाँ हिमालय प्रहरी बनकर,
सदियों से सीना ताने खड़ा है।
जहाँ गंगा की निर्मल धारा में,
ऋषियों का पावन तप बहता है।
इस मिट्टी की हर मुट्ठी में,
वीरों का रक्त समाया है।
हँसते-हँसते प्राण न्योछावर कर,
भारत का मान बढ़ाया है।
तिरंगा केवल ध्वज नहीं,
ये करोड़ों सपनों का सम्मान है।
इसके मान की रक्षा करना,
हर भारतीय का स्वाभिमान है।
आओ मिलकर ऐसी राह चुनें,
जिससे भारत और महान बने।
ज्ञान, कर्म और एकता के बल पर,
विश्व में इसकी नई पहचान बनेगी।
जब तक साँसें इस तन में हैं,
भारत तेरा गुणगान रहेगा।
मेरे शब्दों की हर धड़कन में,
बस तेरा ही सम्मान रहेगा।
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