आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

क्यूं तूने झूठा झूठा साथ देने का हरदम वादा किया

                
                                                         
                            एक आख़िरी इच्छा है ......
                                                                 
                            

कि बस मरने से पहले
एक बार तू मेरे सामने हो

और मैं तेरा गिरेबान दोनों हाथों से
पकड़ तुमसे पूछ सकूं कि आखिर क्यों

जब तुझे मेरा होना नहीं था
मुझसे तुझे कुछ लेना देना नहीं था

जब तुमको सिर्फ वक्त बिताना था
अगर तुमको हमें छोड़ जाना था

अगर तुम जानते थे पहले से कि
हम तेरे मुताबिक इंसान नहीं है

तुम्हे पता था ना कि तुम्हारे सिवा
मेरा कोई अपना कोई खास नहीं है

फिर क्यूं आखिर क्यूं तूने मेरा होने का दिखावा किया
क्यूं तूने झूठा झूठा साथ देने का हरदम वादा किया

क्यूं तुमने हर घड़ी हर वक्त हमसे
बेहद प्यार होने का दावा किया
क्यूं तूने मेरी हर उदासी हर मायूसी पर गौर किया

क्यूं तूने मेरे हर दर्द का इलाज किया
बताओ ना जब रुलाना ही था तो
पहले क्यूं इतना हंसा दिया

बोलो जबाव दो आखिर
तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे
अपनी आदत लगा के छोड़ने की

हम तेरे बिना एक पल ना रह पाएं
ऐसा लगाव करके
क्यूं तुमने हमको जीते जी मार दिया
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर