एक आख़िरी इच्छा है ......
कि बस मरने से पहले
एक बार तू मेरे सामने हो
और मैं तेरा गिरेबान दोनों हाथों से
पकड़ तुमसे पूछ सकूं कि आखिर क्यों
जब तुझे मेरा होना नहीं था
मुझसे तुझे कुछ लेना देना नहीं था
जब तुमको सिर्फ वक्त बिताना था
अगर तुमको हमें छोड़ जाना था
अगर तुम जानते थे पहले से कि
हम तेरे मुताबिक इंसान नहीं है
तुम्हे पता था ना कि तुम्हारे सिवा
मेरा कोई अपना कोई खास नहीं है
फिर क्यूं आखिर क्यूं तूने मेरा होने का दिखावा किया
क्यूं तूने झूठा झूठा साथ देने का हरदम वादा किया
क्यूं तुमने हर घड़ी हर वक्त हमसे
बेहद प्यार होने का दावा किया
क्यूं तूने मेरी हर उदासी हर मायूसी पर गौर किया
क्यूं तूने मेरे हर दर्द का इलाज किया
बताओ ना जब रुलाना ही था तो
पहले क्यूं इतना हंसा दिया
बोलो जबाव दो आखिर
तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे
अपनी आदत लगा के छोड़ने की
हम तेरे बिना एक पल ना रह पाएं
ऐसा लगाव करके
क्यूं तुमने हमको जीते जी मार दिया
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