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आजकल के रिश्ते

                
                                                         
                            अब हर रिश्ते से डर लगता है
                                                                 
                            
क्योंकि पता है
या तो वो एक दिन छोड़कर चले जाएंगे
हमेशा के लिए
या फिर वो रिश्ता नहीं निभा पाएंगे
रिश्ते के नाम पर बोझ समझेंगे
साथ दे या ना दे
लेकिन दुख दर्द जरूर दे जाएंगे

डर लगने लगा है हर एक नए रिश्ते से
क्योंकि पता है
हर रिश्ता दर्द का ही दूसरा नाम है
ऐसे नहीं तो वैसे दर्द तो मिलना ही है
अगर साथ रह सकें
तो हर वक्त लड़कर झगड़कर
एक दूसरे को दर्द देकर
बोझ की तरह एक दूसरे को झेलते हैं

मजबूर बने रहते हैं
उस रिश्ते को बचाने की कोशिश में
जिस रिश्ते में रिश्ते जैसा
कभी कुछ था ही नहीं
अगर था
तो कहां चला गया
वह प्यार
जो अब नजर तक नहीं आता
कहीं खो गया है क्या
या फिर वो कभी था ही नहीं

लेकिन अगर साथ नहीं रह सके
गर प्यार दोनों तरफ से है
तो दूर रहकर
साथ रह सकने की जद्दोजहद में
दूरियों में दर्द तो मिलना ही है
समझ नहीं आता क्या सही है

ऐसे नहीं तो वैसे दर्द तो झेलना ही है
चाहे एक दूसरे को बोझ समझ कर
या एक दूसरे से दूर रहकर
चाहे एक दूसरे से परेशान होकर
या एक दूसरे से मिलने की चाहत में

समझौता करना जरूरी है क्या
प्यार करने के बाद
प्यार को ईमानदारी से
नहीं निभाना जरूरी है क्या
बोझ समझना जरूरी है क्या
लड़ना झगड़ना जरूरी है क्या
और सबसे जरूरी बात
बच्चे पैदा करना जरूरी है क्या

क्या शादी
वाकई एक जुए का खेल है
मुझे लगता है नहीं
यह एक ऐसा खेल है
जहां जितता सिर्फ भगवान है
क्योंकि इस खेल में
चित भी उसकी
और पट भी उसकी
हारता तो सिर्फ इंसान है

अक्सर लोग कहते हैं कि
एक हाथ से ताली नहीं बजती
लेकिन ऐसा नहीं है
ताली अक्सर तब भी बज जाती है
जब एक हाथ ताली न बजाना चाहे
और स्थिर रहे
फिर भी दूसरा हाथ उस पर आ गिरे
तब तो ताली बजनी ही है

इस स्थिति में
या तो पहला हाथ
सब कुछ सहन करता हुआ
दूसरे हाथ के नीचे दब जाएगा
या फिर
दूसरे हाथ को
धक्का देकर निकल जाएगा
हमेशा के लिए
दूसरे हाथ से कहीं दूर
यानी तलाक

प्यार
या तो अखबार की तरह होता है
जो नया-नया
बहुत अच्छा लगेगा
बहुत सही लगेगा
जैसे-जैसे दिन बीतेगा
अखबार की तरह
प्यार भी पुराना हो जाएगा
और शाम होते-होते
तो प्यार प्यार नहीं रहेगा
वो तो रद्दी हो जाएगा

या फिर
प्यार बुजुर्ग की तरह होता है
जो शुरू में
बहुत अच्छा और सही तो लगेगा ही
लेकिन वह कभी
पुराना या रद्दी नहीं होगा
जैसे-जैसे दिन बीतेंगे
प्यार और गहरा होता चला जाएगा
प्यार की उम्र बढ़ती जाएगी
ठीक बुजुर्ग की तरह
प्यार हमेशा जिंदा रहेगा
जब तक की सांसे चल रही है
वह कभी रद्दी नही बनेगा।
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8 महीने पहले

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