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अब उम्मीद नहीं

                
                                                         
                            ज़रूरत के हिसाब से बात करते हैं लोग हमसे,
                                                                 
                            
हमने भी अब उनसे उम्मीद करना छोड़ दिया है।

ज़रूरत पड़े तो आज भी साथ खड़े हो जाते हैं,
मगर हर किसी को अपना समझना छोड़ दिया है।

याद तो आज भी करते हैं कुछ लोगों को दिल से,
बस उन्हें याद करके फोन करना छोड़ दिया है।

रिश्ते निभाने की आदत अब भी है हममें,
बस रिश्तों के पीछे भागना छोड़ दिया है।

 
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9 घंटे पहले

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