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"पत्थर हो गई है आज की नारी "

                
                                                         
                            कुछ चंद घटना ओरतों के नाम क्या हुई
                                                                 
                            
लोंग कहने लगे है पत्थर बन गई है आजकल
की नारी
पर किसीको नहीं देखी हर पल उनकी लाचारी...
जब पुरषों ने जन्मते ही मार डाला उन्हें
जब दहेज के लोभीयों ने जिंदा जलाया
किसी ओर की बेटी को दिन दहाडे
जब हवस के पुजारियों ने बनाकर
झुंड बनाकर विलासिता की वस्तु बनाया
जब शिक्षा से भी रही दूर वो
जब बचपन भी उन्होंने
बस घर के कामों में बिताया
काट दिये गए पंख उनकी उड़ान के
तब किसी ने नहीं कहा
पत्थर हो गई है आज की नारी।
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3 महीने पहले

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