आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

याद पिया की

                
                                                         
                            याद पिया की
                                                                 
                            

सावन में छाई हरियाली
धरा की है रंगत निराली
तन मन ये भीगा जाये रे
याद पिया की संग लाये रे

सखियों संग आओ तुम भी
हम मिल यूँ झूला झूलें
सावन के झूले पड़ गये हाय रे
याद पिया की संग लाये रे

सोलह सिंगार करके
नयनो में कजरा भरके
जीयरा मोरा शरमाये रे
याद पिया की संग लाये रे

सुन री कोयलिया तू भी
तेरे पिया को बुलाती होगी
कू कू से मन बहलाये रे
याद पिया की संग लाये रे

सजना की राह निहारूँ
मन ही मन उसे पुकारूं
सावन ये बीता जाये रे
याद पिया की संग लाये रे।
-कविता चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर