याद पिया की
सावन में छाई हरियाली
धरा की है रंगत निराली
तन मन ये भीगा जाये रे
याद पिया की संग लाये रे
सखियों संग आओ तुम भी
हम मिल यूँ झूला झूलें
सावन के झूले पड़ गये हाय रे
याद पिया की संग लाये रे
सोलह सिंगार करके
नयनो में कजरा भरके
जीयरा मोरा शरमाये रे
याद पिया की संग लाये रे
सुन री कोयलिया तू भी
तेरे पिया को बुलाती होगी
कू कू से मन बहलाये रे
याद पिया की संग लाये रे
सजना की राह निहारूँ
मन ही मन उसे पुकारूं
सावन ये बीता जाये रे
याद पिया की संग लाये रे।
-कविता चौहान
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