आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

धर्म विजयी

                
                                                         
                            अधर्म पर हुआ धर्म विजयी
                                                                 
                            
असत्य पर हुआ सत्य विजयी
अन्याय,अत्याचार दूर हटा
दुष्ट,अभिमानी का शीश कटा

था जिसने कुमार्ग अपनाया
उसने हार कर शीश कटाया
रघुवीर ने अवतार लिया
दंभ अभिमानी का चूर किया

था दशानन परम अभिमानी
कुमार्ग पर चलने की ठानी
जब अन्याय अत्याचार बढ़े
कृष्ण नारायण रघुवीर खड़े

हर युग रूप बदलके आये
विधाता ने स्वरूप दिखलाये
चेतावनी देकर समझाया
मूर्ख ने कुमार्ग अपनाया

अनीति,अधर्म पथ चल आया
सत्य सदाचार को भरमाया
अंधक बन यूँ काफूर हुआ
पातकी धर्म से दूर हुआ

सत्य धर्म की हुई थी हानी
मर्यादा भूला अभिमानी
पर स्त्री पर थी दृष्टि लगाई
मलिन पातक दुनिया बनाई

विधाता ने इक थाह लगाई
थाम धनुष पहुँचे रघुराई
तिमिर चीरता प्रकाश हुआ
अधर्म,असत्य का विनाश हुआ

धरा का था तब उद्धार किया
सत्य,मर्यादा का विस्तार किया
दुष्ट दानव को यूँ संहारा
प्रेम से सारा संसार सँवारा

आओ आज प्रण कर जायें
जगत को सुंदर सा सजायें
लोभ,लालच के रावण त्यागे
मन में मर्यादा,राम बसायें।।
-कविता चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर