ख़ुद को उजड़ता देख बहुत रोया एक शहर
सिसकियांँ ले-ले कर रोया वो शहर
उसे एकाएक वो सारी चीखें याद आ गई
जब उसने एक गांव उजाड़ कर बसाया था शहर
-कविता श्री
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