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गीत सरसी छंद

                
                                                         
                            महाकाल का दिव्य महीना,यह श्रावण का मास।
                                                                 
                            
भोले भण्डारी से हम सब ,लगा रहें है आस।।

शिव बम-बम का नारा ले तो,पूर्ण सभी हो काम।
गंगा जलभर कर कावरियाँ,ले आए शिव धाम।
हर सावन के सोमवार को,बना रहे त्यौहार।
भोले भण्डारी से हम सब , लगा रहें है आस।।

शिव के हाथों में डमरू है, गले सर्प विकराल।
सदा भस्म से तिलक करें वह, है कालों के काल।।
शिव को हैं प्रिय नंदी जिनमें, देव करें सब वास।
भोले भण्डारी से हम सब ,लगा रहें है आस


सावन में शिव महिमा गाओ ,तू मत करना भूल।
पैदल चलने में कावरियाँ,धँस जाते हैं शूल।।
सावन में नागों पर करते ,है अब सब विश्वास।
भोले भण्डारी से हम सब ,लगा रहें है आस।।
-सूरज तिवारी
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2 महीने पहले

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