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शूल रस्ते बिछे, पंथ चलते रहें।

                
                                                         
                            शूल रस्ते बिछे, पंथ चलते रहें।
                                                                 
                            
स्वप्न टूटे भले, आग जलती रहे।

घोर बाधा खड़ी, पार जाएँ अभी।
आग जागी नई, ताप पाएँ सभी।
वज्र सीने अड़े, वार सहते रहें।
शूल रस्ते बिछे, पंथ चलते रहें।


रक्त पोंछा नहीं, स्वेद बहता रहा।
मौन घावों भरा, दर्द कहता रहा।
आस छूटी नहीं, भोर होगी नई।
रात रूठी रही, ओस रोती गई।
घाव रिसते गए, दर्द सहते रहें।
शूल रस्ते बिछे, पंथ चलते रहें।

काल वैरी बना, वीर सीना तने।
पाश जकड़े हमें, लौह सांचे बने।
सत्य सोता रहा, शूर बांके लड़े।
रक्त माटी सनी, प्राण प्यासे अड़े।
धैर्य टूटे नहीं, मौन रहते रहें।
शूल रस्ते बिछे, पंथ चलते रहें।

प्राण सौंपा यहां, लक्ष्य पाना हमें।
स्वप्न बोया नया, सत्य लाना हमें।
मेघ गरजे भले, सूर्य चमके नया।
पंख फैले अभी, भाल दमके नया।
गीत रचते नए, ज्वाल भरते रहें।
शूल रस्ते बिछे, पंथ चलते रहें।
-भानु शर्मा रंज
 
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2 महीने पहले

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