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शब्द बनूं मैं अर्थ बनो तुम

                
                                                         
                            शब्द बनूं मैं अर्थ बनो तुम
                                                                 
                            
गीत बनूं मैं भाव बनो तुम
मेरे इस एकाकीपन का
एक मधुर ठहराव बनो तुम
शब्द बनूं मैं अर्थ बनो तुम

मैं सरिता की व्याकुल धारा
तुम सागर की गहराई हो
मैं विरह की तपती दोपहरी
तुम सावन की पुरवाई हो
प्यास जनम की बुझ जाए जहाँ
प्यार का वो पड़ाव बनो तुम
शब्द बनूं मैं अर्थ बनो तुम

मैं कोरे कागज़ की कविता
तुम उसका श्रृंगार बनो
मैं स्पंदन हूँ इस हृदय का
तुम ही मेरा प्यार बनो
मेरी बिखरी सी लहरों का
शांत सुखद सा बहाव बनो तुम
शब्द बनूं मैं अर्थ बनो तुम

मैं रजनी की ओस सरीखी
तुम भोर का पहला राग बनो
मैं बाती सी जलती जाऊँ
तुम पावन दीपक की आग बनो
सर्द हवा के इस मौसम में
जलता हुआ अलाव बनो तुम
शब्द बनूं मैं अर्थ बनो तुम

मैं देह बनूं तुम प्राण बनो
मैं श्रद्धा तुम भगवान बनो
मैं मिट्टी की मूरत कोरी
तुम मेरे अंदर जान बनो
भँवरों में फँसती नैया की
पार लगाती नाव बनो तुम
शब्द बनूं मैं अर्थ बनो तुम
गीत बनूं मैं भाव बनो तुम
-भानु शर्मा रंज
 
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एक महीने पहले

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