गीत
प्राण प्यासा रहा, नीर बहता गया।
दर्द सूना जगा, मौन कहता गया।
चांद फीका पड़ा, रात डसती रही।
तार टूटे सभी, पीर हंसती रही।
गीत रूठा खड़ा, अश्क ढलता गया।
प्राण प्यासा रहा, नीर बहता गया।
फूल सूखे सभी, बाग रोता रहा।
भृंग प्यासा उड़ा, राग सोता रहा।
चैन खोया कहीं, ध्यान भटका किया।
प्राण तड़पे बड़ा, घाव टीसा किया।
नेह धागा कचा, ख्वाब छलता गया।
प्राण प्यासा रहा, नीर बहता गया।
रूप माया ठगी, नैन रोते रहे।
स्वप्न शीशे गिरे, अश्क बोते रहे।
मीत बिछड़े जभी, पीर बढ़ती गई।
याद आती रही, आस घटती गई।
काल सूना हुआ, जिस्म जलता गया।
प्राण प्यासा रहा, नीर बहता गया।
मौन होंठों पड़े, बात रूठी रही।
आस सूखी सभी, प्यास जूठी रही।
जीव भटका किया, राह सूनी हुई।
छांव खोई कहीं, धूप दूनी हुई।
रंज रोता रहा, दृश्य ढलता गया।
प्राण प्यासा रहा, नीर बहता गया।
-भानु शर्मा रंज
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X