काजर वारे नैन हमारे, उन पर जोबन वारे
पनघट पे जब दरस भये तो, हम तो सब जग हारे
प्रीति-नगरिया के रस्ते हम, बंजारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए
चुनरी मेरी धानी-धानी, मनवा फागुन-फागुन
बिना सलोने पीत वसन के, सूने लागे सावन
कदम की छैयाँ बाट जोहते, नैन थके अब मेरे
साँझ भई पर आये नाहीं, मेरे प्रीत-लुटेरे
सजल नयन के अश्रु हमारे, सितारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए
प्रेम अगन में जरि-जरि के मैं, कुंदन सी भई गोरी
साँवरिया ने अपने रंग में, रंगी राधिका भोरी
छूटी मेंहदी, फीके कँगना, सब शृंगार तजे हैं
मन-मन्दिर में केवल मेरे, नटवर लाल सजे हैं
जग के सारे झूठे नाते, किनारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए
मौन अधर अब गावन लागे, प्रेम-सुधा की बानी
देखि छटा उस नन्दलाल की, मैं तो भई दीवानी
प्रीत हमारी पावन जैसे, यमुना जी की धारा
तन-मन सब कुछ अर्पण कीन्हा, जपुं मैं नाम तिहारा
भक्ति-सुधा के निर्मल जल के, फव्वारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए
काजर वारे नैन हमारे, उन पर जोबन वारे
पनघट पे जब दरस भये तो, हम तो सब जग हारे
प्रीति-नगरिया के रस्ते हम, बंजारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए
-भानु शर्मा रंज
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X