बाँधी हमने नेह की डोरी वाने गाँठ लगाई
सिसक सिसक के रैन बिताई पलकन नींद न आई
बिरहा के विष प्याले ही निवाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये
सूखे सब पनघट जीवन के उजड़ी कुंज गलियारी
लुट गयो मेरो रूप सिंगार लुट गई दुनिया सारी
रंग बिरंगे सावन मोको अब तो डरावन लागे
भँवरा फूलन ते मुँह फेरे पपिहा प्यासो भागे
सूने मन के पनघट पे भँवर जाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये
मारै पाथर दुनिया सारी हम सीसा बन टूटे
बाँधे जेते नेह के धागे वे सगरे ही छूटे
टूट टूट कर बिखरे हम तो टुकड़े भये हजार
हर टुकड़े में दरस रहे हैं पीतम को आकार
दरद पिरोये अश्क ही उजाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये
जहर दियो जो निरमोही ने अमरित मान लियो है
हँसत हँसत ही विरह अगनि में जियरा जार दियो है
धुँआ धुँआ सी भई जिंदगानी राख भई सब देह
तौ भी हमने तज्यो न सजनी अपने पी को नेह
नैनन के शर तीर ही अब भाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये
चुपके चुपके मौन मेरो ही भारी शोर भयो है
बिन बोले ही नैनन सों अब साँचो जोग लग्यो है
झूठे जग के कोलाहल में सिसकी कहुँ खो जावै
रंज विरह की घुमड़न जिय में सावन नित बरसावै
रंज के गीत विरह के अब शिवाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये
बाँधी हमने नेह की डोरी वाने गाँठ लगाई
सिसक सिसक के रैन बिताई पलकन नींद न आई
बिरहा के विष प्याले ही निवाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये
-भानु शर्मा रंज
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