आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मतवाले भये

                
                                                         
                            बाँधी हमने नेह की डोरी वाने गाँठ लगाई
                                                                 
                            
सिसक सिसक के रैन बिताई पलकन नींद न आई
बिरहा के विष प्याले ही निवाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये

सूखे सब पनघट जीवन के उजड़ी कुंज गलियारी
लुट गयो मेरो रूप सिंगार लुट गई दुनिया सारी
रंग बिरंगे सावन मोको अब तो डरावन लागे
भँवरा फूलन ते मुँह फेरे पपिहा प्यासो भागे
सूने मन के पनघट पे भँवर जाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये

मारै पाथर दुनिया सारी हम सीसा बन टूटे
बाँधे जेते नेह के धागे वे सगरे ही छूटे
टूट टूट कर बिखरे हम तो टुकड़े भये हजार
हर टुकड़े में दरस रहे हैं पीतम को आकार
दरद पिरोये अश्क ही उजाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये

जहर दियो जो निरमोही ने अमरित मान लियो है
हँसत हँसत ही विरह अगनि में जियरा जार दियो है
धुँआ धुँआ सी भई जिंदगानी राख भई सब देह
तौ भी हमने तज्यो न सजनी अपने पी को नेह
नैनन के शर तीर ही अब भाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये

चुपके चुपके मौन मेरो ही भारी शोर भयो है
बिन बोले ही नैनन सों अब साँचो जोग लग्यो है
झूठे जग के कोलाहल में सिसकी कहुँ खो जावै
रंज विरह की घुमड़न जिय में सावन नित बरसावै
रंज के गीत विरह के अब शिवाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये

बाँधी हमने नेह की डोरी वाने गाँठ लगाई
सिसक सिसक के रैन बिताई पलकन नींद न आई
बिरहा के विष प्याले ही निवाले भये
पीवत पीवत हम तो मतवाले भये
-भानु शर्मा रंज
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर