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आज पराई डार उड़ी है घर की सोन चिरैया री

                
                                                         
                            गीत - आज पराई डार उड़ी है घर की सोन चिरैया री
                                                                 
                            

छूट रही बचपन की गलियाँ छूट रहे सब आम बबूल
पाँव महावर रंगे तुम्हारे महक रही आँगन की धूल
चुप है तुलसी की क्यारी मौन हुई घर की गौरैया री
आज पराई डार उड़ी है घर की सोन चिरैया री
आज पराई डार उड़ी है घर की सोन चिरैया री

कागज़ की नावों का पानी बीती रातें सावन वाली
छत पर छुप कर बातें करना यादें मीठी मतवाली
छूट गई वो छुपन छुपाई रूठ गई मेरी परछैयाँ री
आज पराई डार उड़ी है घर की सोन चिरैया री

माँ के आँचल की वो ममता बाबूजी की मौन उदासी
भैया की आँखों में छुप कर उतरी है इक बदरी प्यासी
यादों की गहरी नदिया में तू ही तो थी मेरी खिवैया री
आज पराई डार उड़ी है घर की सोन चिरैया री

जाना है तो जा पर सुन ले अब नदियाँ बन बहना तू
नवल चमन की माटी में अब कस्तूरी बन रहना तू
नवल भोर सा खिले भाग्य हर सुख लूँ मैं तेरी बलैया री
आज पराई डार उड़ी है घर की सोन चिरैया री
आज पराई डार उड़ी है घर की सोन चिरैया री
-भानु शर्मा रंज
 
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3 महीने पहले

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