चमत्कार, पाखंड, ठगी जब धर्मास्था बन जाते हों।
पहन मज़हबी चोला पशुबलि –हिंसा कर्म बताते हों।
जहाँ धार्मिक नारों से पा जाते बद्नेता सत्ता;
‘दक्ष’ वहाँ फिर शायद ही विज्ञान–तर्क बढ़ पाते हों।
-कौशल किशोर मौर्य
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X