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में ये चाहता हूँ फिर से वो ही दिल मेरा दुखाए

                
                                                         
                            में ये चाहता हूँ फिर से वो ही दिल मेरा दुखाए
                                                                 
                            
न गिला करुँ में कोई मेरे सामने तो आए

जो हैं गैर के ही दिल में कभी उसके दिल में हम थे
मुझे गैर ना कहे वो कोई उसको ये बताए

मेरे दिल में राज़ है जो कोई अन सुना सा नग्मा
उसे जाके कोई कह दे मुझे आके वो सुनाए

है उदास मेरी आंखें न दिखी है इनको मंजिल
मुझे यार की गली का कोई रास्ता दिखाए

मेरे घर पे रोज सजने चली आती है उदासी
मुझे इंतिजार है बस वो भी आके मुस्कुराए

 
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एक घंटा पहले

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