हैं झील से गहरे नैन उनके,
मुख पर शीतल-सी मुस्कान है
रूप उनका अनुपम है,
जिसका न कोई बखान है।
चेहरे का वो तेज ऐसा,
कि चाँद भी देखे शर्मा जाए।
होठों पर लाली ऐसी,
देखे अगर सुध-बुध खो जाए।
मुरली की तान ऐसी मनोहर उनकी,
पूरी सृष्टि वृंदावन हो जाए।
घुँघराले बाल ऐसे,
सावन के मेघ भी लज्जा जाए।
चले ठुमक - ठुमक ऐसे,
के ब्रज की गलियां भी खिलखिलाए।
शृंगार ऐसा दिव्य, अलौकिक उनका,
शिव भी मोहित हो जाए।
चरण-कमल गंगा से पवित्र,
तर्जनी पर सुदर्शन शोभे,
कनिष्ठा पर गोवर्धन विराजे।
राधा जपते निरंतर,
और जो भी जपे उनका नाम,
वैकुंठ धाम को वो प्राणी प्राप्त हो जाए।
हैं अनेकों नाम और लीलाएँ उनकी,
हैं सर्वोत्तम, उत्तम सारथी वो।
सखा मेरे, प्रियतम मेरे,
है मेरे कृष्ण मुरारी वो।
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