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सत्ता का संविधान

                
                                                         
                            व्यापारी ने व्यापारी से युद्ध किया
                                                                 
                            
व्यापारिक,
व्यापारी हारा, व्यापारी जीता
व्यापार की मृत्यु हुई।
व्यापारी ने दास बनाया
पूरे देश को
व्यापारी ने सत्ता संभाली
पूरे देश की
नाम रखा "ब्रिटिश इंडिया"।
फिर क्रांति के लिए बजी
रणभेरी
हिंसा हुयी
कुछ मारे गये
कुछ ताक में थे
अवसर की,
नाटक किया स्वतंत्रता संग्राम का
लिख लिया अपना संविधान
करते हुये अनुकरण
विदेशी संविधानों का
जिसमें नहीं होता कुछ भी
देशी।
सत्ता गई, सत्ता आई
पर क्रांति नहीं हुई
सत्ता परिवर्तन हुआ।
गोरों के चाबुक
ले लिए कालों ने,
पहले देश परतंत्र था
फिर प्रजा परतंत्र हुई।
व्यापार आज भी रहता है
सत्ता के केंद्र में।
सारी नीतियाँ
सारे विधान
सारी व्यवस्था
रहती है
व्यापार केंद्रित।
तुमसे छीने गये
तुम्हारे कुटीर उद्योग
छीना गया व्यापार
और थमा दिये गए
व्यापारिक दक्षता के नाम
बना कर जातियाँ
जो पिछड़ती गईं
खोती गईं अपना अस्तित्व
होते हुये रूपांतरित
वैश्य और शूद्र से
दलित
अतिदलित
और महादलित तक।
व्यापार
आज भी है
सत्ता के केंद्र में।
बड़े-बड़े प्रधानमंत्री
होते हैं नतमस्तक
सम्राट
रोटे शील्ड और
व्यापारी
वास्को द गामा और
शी जिन पिंग के समक्ष।
संविधान
लिखे जाते हैं
इन्हीं के लिए।
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एक महीने पहले

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