मेरे गुरुओं ने दी मेरे चरित्र को नई पहचान,
मेरे शिक्षक सचमुच थे बड़े महान।
मैं जानती तो थी उन्हें, पर समझ न पाई थी पूरा,
उनके बिन जीवन का हर ज्ञान था अधूरा।
माँ-बाप के बाद बस उन्होंने ही ये सपना पिरोया,
कि पा लूँ मैं हर लक्ष्य, जो भी मैंने जीवन में खोजा।
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