तमाम उम्र जो खुद को थकाए रखता है,
वो बाप है जो घर को घर बनाए रखता है।
कभी न देखा जिसे रोते हुए जमाने में,
वो दिल में दर्द का दरिया छुपाए रखता है।
मैं अपनी ऊँची उड़ानों पे नाज़ करता हूँ,
मगर वो नीव है जो मेरा सर उठाए रखता है।
मेरी हथेली पे सूरज चमकता रहता है,
वो शख्स धूप को बाहर भगाए रखता है।
खुदा से माँगूँ तो 'कपिल' मैं और क्या माँगूँ,
जो हाथ सर पे दुआएँ सजाए रखता है।
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