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कैद और स्त्री

                
                                                         
                            तुम कहते हो,
                                                                 
                            
यह कैद नहीं,
बस एक सुरक्षा-कवच है।
यह माँ-बाप की चिंता है,
उनकी दी हुई सीख और सबक है।

तुम्हें कैद का मतलब भी पता है?

कैद तब होती है,
जब तुम्हारे सामने खुला आसमान हो,
लेकिन तुम उड़ न सको।

कैद तब होती है,
जब तुम्हारे सामने पूरी दुनिया हो,
लेकिन एक छोटा-सा पिंजरा
तुम्हारी दुनिया की सीमा बन जाए।

कैद तब होती है,
जब तुम खुलकर हँसना चाहो,
खुलकर रोना चाहो,
लेकिन तुम्हारी हँसी और आँसुओं पर भी
तुम्हारा अधिकार न हो।

कैद तब होती है,
जब सब कह रहे हों—
“तुम्हें तो बहुत अच्छा जीवन मिला है।”

लेकिन तुम्हें साफ दिखाई दे रहा हो
कि यह जीवन
महज़ एक सोने का पिंजरा है।

कैद किसे कहते हैं?

कैद तब होती है,
जब कैदी के भीतर से
कैदी होने का एहसास ही मिटा दिया जाए।

उसे कैद कहते हैं...

कैद ने इतने रूप बदल लिए हैं
कि अब उसे पहचानना
मुश्किल होता जा रहा है।

कैद का अर्थ तब समझ आता है,
जब कैदी को अपने पैरों की बेड़ियाँ
अपने पैरों की पायल लगने लगें।

और शायद अंत में
तुम इसे समझ नहीं पाओगे...

क्योंकि जो कैद में नहीं है,
वह कैदी की सज़ा को
सज़ा कैसे समझेगा?

कैद वही समझ सकता है,
जो कभी कैदी रहा हो।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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