नज़र जब आईने पर हो तो पर्दा तेरा होता है,
मैं खुद को देखता हूँ और चेहरा तेरा होता है।
निभाई इस क़दर हमने रफ़ाक़त उम्र भर तेरी,
कि अब खुद से भी लड़ते हैं तो लहज़ा तेरा होता है।
कभी जब सोचता हूँ मैं कि तुझको भूल जाऊँ अब,
मिरे दिल में मुसलसल एक सदमा तेरा होता है!
ज़माना पूछता है जब मिरी आँखों की वीरानी,
तो लफ़्ज़ों में बयाँ हर बार चर्चा तेरा होता है।
भुला कर अपनी हस्ती को बसाया दिल में बस तुझको,
वफ़ा की इस तिजारत में ख़सारा तेरा होता है।
-कन्नु सैनी
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