तन्हाई के जाल बहुत हैं,
हम भी तो बेहाल बहुत हैं ।
देखा बचपन और बुढा़पा ,
जो हैं मालामाल बहुत हैं ।
तन्हाई -----------------------
मन उदास रहता रहने दो,
दुनिया कहती है कहने दो ।
चार दिनों की और जिन्दगी ,
जैसे हैं खुशहाल बहुत हैं ।
तन्हाई ------------------------
टूटा घर टूटी दीवारें,
बैसे हम तो मन से हारे।
लेकिन जीवन से लड़ लेंगे,
जीवन में भूचाल बहुत हैं ।
तन्हाई ----------------------
अंतर मन की बात न पूछो,
गुजर गई वो रात न पूछो ।
मन है सागर के जैसा पर,
मन में प्रलयकाल बहुत हैं ।
तन्हाई ----------------------
"कमल" बुन रहा ताना बाना,
अब इस जग में नहि है आना ।
देख चुके हम दुनियादारी ।
दुनिया में बदहाल बहुत हैं ।
तन्हाई ------------------------
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