सफ़र है तेरी हुस्नयारी का जो रुकता नहीं,
कायदा है तेरे हुस्न का जो बरसता नहीं ।
हम तो अंधकार में ढूंढते रहे तुझको *कौशल
हुई उल्फ़त जिनका कारवां कभी रुकता नहीं
-के.के.कौशल
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