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आँसू का दरिया

                
                                                         
                            आँखों से पानी बहाकर
                                                                 
                            
एक दरिया बनाऊँगा,
तुम एक कश्ती ले आना,
मैं पतवार चलाऊंगा।

तुम चुपचाप बैठ जाना,
कुछ भी न पूछना,
मैं अपनी खामोशी की
दास्तान सुनाऊँगा।

जब सफ़र ख़त्म होगा,
दरिया भी थम जाएगा,
शायद इन आँखों का पानी
तब कुछ कम हो जाएगा।

आँखों से पानी बहाकर
एक दरिया बनाऊँगा,
तुम एक कश्ती ले आना…
अपने दिल की सैर कराऊँगा।

—कमल किशोर झा 
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2 महीने पहले

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