ये माना कि मेरे सर पर कोई ताज नहीं है....
पर आपसे बढ़कर मेरा कोई सरताज नहीं है...
मैं खुश हूँ कि हमारे बीच कोई राज़ नहीं है...
और आपसे बढ़कर कोई मेरा हमराज़ नहीं है....
हर वक्त इज़हार-ए-मोहब्बत करूँ ये मेरा अंदाज़ नहीं है....
क्योंकि मेरा इश्क़ लफ़्ज़ों का मोहताज नहीं है....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X