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जिनके बलिदान से रोशन है देश

                
                                                         
                            जिनके बलिदान से रोशन है देश,
                                                                 
                            
उन अमर वीरों को शत -शत प्रणाम।
जिनकी सांसों में बसता था भारत,
जिनकी धड़कनों में गूंजता था राष्ट्रगान।

जिनके लहु की हर लाल बूंद ने,
धरती का मस्तक ऊंचा किया।
जिनके साहस ने अंधियारे में,
स्वतंत्रता का दीपक जला दिया।

जब सीमा पर तूफ़ान उठे,
जब आकाश अग्नि बरसाता था।
तब भारत मां का हर पृहरी ,
मुस्काकर सीना तान खड़ा हो जाता था।

न मां की गोद रोक सकी ,
न बच्चों का भोला प्यार।
न जीवन का कोई मोह,
न मृत्यु का कोई विचार।

बस एक ही सपना आंखों में था,
भारत का सम्मान अमर रहे।
तिरंगा सदा गगन में लहराए ,
जन-जन का स्वाभिमान अमर रहे।

हिमालय ने उनका साहस देखा,
सागर ने उनका प्रण जाना।
मरूभूमि की तपती रेतों ने,
उनका अटल संकल्प पहचाना।

घने जंगल भी गवाही देते,
कैसे वीर डटे रहते थे।
आंधी, वर्षा,बर्फ और अग्नि में,
भारत के प्रहरी हंसते थे।

उनके चरण जहां पड़ जाते,
वह मिट्टी तीर्थ बन जाती।
उनकी अंतिम सांस की गूंज,
हर पीढ़ी को राह दिखाती।

जब तिरंगा नभ में लहराता है,
हर रंग एक कहानी कहता है।
केसरिया त्याग का प्रतीक बने,
श्वेत शांति का दीपक रहता है।
हरा रंग समृद्धि का संदेश दे,
अशोक चक्र कर्म का पथ कहता है।

हे वीरों! तुम केवल सैनिक नहीं,
भारत की जीवित आत्मा हो।
तुम्हारे त्याग के कारण ही,
हम सबकी सांसों में स्वतंत्रता है।

किसी ने कारगिल की चोटियों पर,
विजय का इतिहास रचा।
किसी ने रेगिस्तान की रेतों में,
भारत का गौरव ऊंचा रखा।

किसी ने बर्फिली चौकी पर,
अंतिम सांस तक पहरा दिया।
किसी ने अपने रक्त से,
तिरंगे का हर रंग सजा दिया।

मां ने आंसू पीकर बेटे को,
सीमा पर भेज दिया हंसकर।
पत्नी ने कांपते हाथों से,
माथे पर विजय तिलक किया सजाकर।

नन्हे बच्चे द्वार पर खड़े रहे,
"पापा जल्दी लौट आना"कहते।
पर लौटी जब तिरंगे में लिपटी देह,
तब भी उनके नाम पर दीप जलते।

कितनी बहनों की राखी सूनी,
कितनी मांगों का सिंदूर मिटा।
फिर भी भारत मां के बेटों ने,
कर्तव्य का पथ कभी न छोड़ा।

आज अगर खेतों में हरियाली है,
विद्यालयों में बच्चों की हंसी है।
मंदिरों में आरती की धुन है,
तो उसमें वीरों की तपस्या बसी है।

जब कोई बच्चा राष्ट्रगान गाता है,
जब कोई किसान हल चलाता है।
जब कोई वैज्ञानिक नई उड़ान भरता है,
हर सफलता में शहीदों का आशीष आता है।

आओ ऐसा भारत बनाएं,
जहां प्रेम ही पहचान बने।
जाति, धर्म और भाषा से ऊपर,
राष्ट्र का हमारा सम्मान बने।

हम श्रम को पूजा मानेंगे,
ईमान को अपना धर्म करेंगे।
भ्रष्टाचार और घृणा छोड़कर,
भारत का उज्जवल कर्म करेंगे।

जब तक सूरज चांद रहेगा,
वीरों!तेरा नाम रहेगा।
हर दिल में तेरा सम्मान रहेगा,
हर घर में तेरा गुणगान रहेगा।

तुम इतिहास नहीं, भविष्य हो।
तुम स्मृति नहीं, प्रेरणा हो।
तुम दीप नहीं, सूर्य हो।
तुम केवल बलिदानी नहीं,
भारत की अमर चेतना हो।

आओ,हम सब मिलकर प्रण करें ,
देश का मान कभी न झुकने देंगे।
वीरों के सपनों का भारत,
हम अपने कर्मों से गढ़ेंगे।

जिनके बलिदान से रोशन है देश,
उनका ऋण कभी चुकाया न जाएगा।
जब तक इस धरती पर भारत रहेगा,
हर शहीद अमर कहलाएगा।

शत -शत नमन उन अमर वीरों को,
जिनकी चिंताओं से प्रकाश मिला।
उनके बलिदान की पावन ज्वाला से,
हम सबको स्वतंत्र आकाश मिला।
-काजोल उइके
 
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2 महीने पहले

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