जिसे उड़ने में महारत होती हे
बेकारी बेचारी गरीब होती हे
जो बोलता नहीं देखते ही रहता
नजर खुद उसकी जुबान होती हे
ये दो हाथ बस हमको हमारी
जलती धुप में पैड़ की छाँव होती हे
ऐक शब्द को गूंगा बहरा देदे
इसी तरह जिंदगी बसर होती हे
चला जाता हे दूर तक तीर उसका
पास जिनके गुरु की तस्वीर होती हे
खुशबु चली जाती सरहद पार जिसकी
जिनकी किताबो में कुछ जान होती हे
केबी सोपारीवाला
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X