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तुम, मैं और यह दूरियाँ ।

                
                                                         
                            तुम यह जो दूरियाँ बना रहे हों दरमिया हमारे,
                                                                 
                            
यह मेरा वहम हैं सिर्फ़, या दस्तूर ए किस्मत।
चल मान भी लें हम कि यह दस्तूर ए किस्मत हैं,
तो वैसे भी हम रोक ना पाएंगे यह दूरियाँ,
तो दिल को मलाल कैसा, रंज ग़म कैसा ।
कभी सोचता हैं दिल मेरा, काश यह वहम होता,
वहम होता तो कितना अच्छा होता,
वहम टूटने से दूरियाँ मीट जाती।
वहम टूटने से दूरियाँ मीट जाती।
सोचूँ एक पल भी तो दिल डरता हैं,
तुम, मैं और यह दूरियाँ,
यह दूरियाँ दरमिया हमारे।
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13 घंटे पहले

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