ऐ मेरी सरज़मीं!
तुझपे है हमको यक़ीं
हम तेरी मिट्टी से हैं
तू है हमारी ज़मीं।
तुझको जो गौरवान्वित करे
हर उस कर्म पर चलें
भारत मां! तेरी प्रेरणा से
अपना जीवन भरें।
तेरी पावन धूल में
जीवन का सम्मान है
तेरी नदियों की धारा में
संस्कृति की शान है।
हिमगिरि से सागर तक
तेरा अनुपम विस्तार
तेरी रक्षा का संकल्प लेकर
बढ़ते रहे हर बार।
सत्य, त्याग और साहस का दीप
हम सदा जलाएं
तेरे गौरव के गीत
हम मिलकर सदा ही गाएं।
गुलामी की बेड़ियां तोड़ी
जिन क्रांतिवीरों ने
दे दी अपनी जान
अंग्रेजों से आजादी के लिए
कर दिया सब कुछ कुर्बान
उनको शत-शत नमन
ऐ मेरी सरज़मीं!
तुझपे है हमको यक़ीं
हम तेरी मिट्टी से हैं
तू है हमारी ज़मीं।
तुझको जो गौरवान्वित करे
हर उस कर्म पर चलें
तेरी प्रेरणा से अपना जीवन भरें।
ज्ञान बने हमारी शक्ति,
सेवा बने पहचान,
प्रेम और सदभाव से
महके अपना हिंदुस्तान।
जाति, धर्म के भेद मिटाकर
हाथों में हाथ धरें,
एकता की डोर से हम
नव भारत का निर्माण करें।
मेहनत को ही पूजा मानें
कर्म बने अभियान
विश्वगुरु बनने का जग में
फिर से हो सम्मान।
ऐ मेरी सरज़मीं!
तुझपे है हमको यक़ीं
हम तेरी मिट्टी से हैं
तू है हमारी ज़मीं।
जब भी मातृभूमि पुकारे
सबसे आगे आएं,
तन, मन, धन और अपना
सर्वस्व तुझ पर लुटाएं।
न्याय, करुणा और मानवता का संदेश फैलाएं,
हर बच्चे के मन में भारत का गौरव जगाएं।
तेरी आन, तेरी शान रहे
युग-युग तक अमर
जय-जय भारत, जय-जय भारत, गूंजे घर-घर बस यही एक स्वर।
वंदे मातरम् ! वंदे मातरम्!
भारत माता की जय!
भारत माता की जय!
-ज्योति वर्मा
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