तुम धरती से हो जाओ!
तुम धरती से हो जाओ
या फिर आसमान से,
नहीं तो सागर से हो जाओ
पर अपनी ही पहचान से
अपने ही रंग में रंग जाओ।
धरती बनकर धीरज रखना
बीजों में विश्वास जगाना,
नयी खाद, नयी ऊर्जा देना
सागर सी गहराई रखना
लहरों सा आगे बढ़ते जाना। आसमान बन तुम
सपनों को दे देना विस्तार
तुम धरती से हो जाओ
या फिर आसमान से,
नहीं तो सागर से हो जाओ।
पर अपनी ही पहचान से
अपने ही रंग में रंग जाओ।
राह कठिन हो, पांव थके तो,
हौसलों को सोने मत देना
टूटे पलों को गीत बनाकर,
मन को फिर से रोने मत देना
जीवन अपना गीत स्वयं हो
पहचान दूसरे की उधार न लेना।
तुम धरती से हो जाओ
या फिर आसमान से
नहीं तो सागर से हो जाओ।
मिट्टी में हो या फिर जल में हो
या फिर गगन की छांव में हो
खुद को पाना ही जीवन है
खुद को खोना असली धोखा है।
जहां खड़े हो, वहीं खिला दो फूल
अपनी ताकत से, नये विश्वास से।
तुम धरती से हो जाओ
या फिर आसमान से,
नहीं तो सागर से हो जाओ
पर अपनी ही पहचान से
अपने ही रंग में रंग जाओ।
-ज्योति वर्मा
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