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मेरी मुस्कान

                
                                                         
                            मेरी रुनझुन, मेरी गुड़िया
                                                                 
                            
गीत जहान के सुनाती ।
मैं हंसती मुस्कुराती ,
कहती ,अपनी भी सुनाओ कहानी ।
वह जग की बताती, मैं उसकी सुनती।
वह गुनगुनाती मैं लोरी सुनाती ।
वह खिल खिलाती, मैं अंक में छुपा लेती।
वो अपनी दुनिया ,अपनी जन्नत में समा जाती।
बांहें गले में डालकर, फ़ूल कर सुनाती।
मां मेरी भी सुन कहानी ।
मैं तेरी बिटिया, करना ना कभी दूर खुद से, रहूंगी पास सदा तेरे सदा तेरी खुशी का कारण बन कर।
बात जुदाई की कभी ना करना ।
मैं तेरा सुर तू मेरा गीत।
कभी ना करना मुझे जुदा ,
ना जी पाऊंगी मैं तेरे बिना ।
मां !मेरी बस इतनी कहानी है ,
मैं तुझसे हूं ,तू मेरी है।।
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2 वर्ष पहले

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