निगाहें मिलाने से क़तरा रही थी
मुझे झूठी बातों में उलझा रही थी
थी बस दोस्ती उससे और कुछ नहीं था
बहुत ज़ोर देकर वो समझा रही थी
-जॉनी अहमद क़ैस
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