देखता है तू आपदा भी,
तेरे हाथ में है कुछ नही,
कारण तुझे पता है,
तू सोचता क्यों नहीं,
इंसानियत अब बची नही,
अच्छी सोच की कदर नही,
बदलता तू है नही,
बेजुबान को तू छोड़ता नही,
प्लास्टिक का उपयोग तू रोकता नही,
सूखे तालाब अब भरते नही,
महंगाई है जो घटती नही,
दंगे फसाद रुकते नहीं,
रोजगार अब मिलते नही,
अपनापन अब दिखता नहीं,
गरीबों का शोषण अब रुकता नही,
बीमारी का इलाज अब बस का नही,
पूंजीवाद का निवारण नही,
इंसानियत का कोई मसीहा नही,
नेताओ को फुर्सत नही,
कर्ज है जो घटते नही,
व्यंग्य अब होता नही,
इंसान तू बोलता नही,
देश की तू सोचता नही।
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